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ये कहा आ गये हम

December 24, 2020

हरियाणा वह प्रदेश है जहां के निवासी गाम तो छोड़ो गुहाण्ड की छोरीयां नै भी बहन/बेटी मान्या करते, चाहे वह किसे भी जात की हो। विकास की या कौनसी हवा चाली के चार-पांच साल की जातगी भी हवासपूर्ती का साधन बन गयी। और पिछले 2-3 हफ़्ते तै तो ज्यादा समाज का सत्यानाश होण लाग् रह्या […]

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अमीर और गरीब

December 24, 2020

अमीर और गरीब की खाई हमेशा ही रही है। दो फिल्मी स्थितियां देखिए – एक श्रीमान शेखर कपूर और एक संजय लीला भंसाली।दोनों ने विवादित फ़िल्म बनाई। शेखर कपूर ने फूलन देवी की सच्ची कहानी पर। भंसाली ने जायसी द्वारा रचित उपन्यास पद्मावत पर।शेखर कपूर ने नायिका को बिल्कुल निवस्त्र कर पर्दे पर उतारा यहां […]

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लाख बुराइयां हैं

December 24, 2020

लाख बुराइयां हैं हिन्दू धर्म में परंतु इसमें एक अच्छाई भी है। यह लचीला धर्म है, इसको मानने वाले किसी भी बाबा, सत्संगी या किसी भी पूजा पद्धति को अपना सकते हैं। क्या यह आज़ादी किसी अन्य धर्मों में है? सभी धर्मों के धर्म प्रचारक अपने धर्म को बढ़ाने के लिए अनेक तरीके अपनाते हैं, […]

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‘हट जा ताऊ पाछै नै’

December 24, 2020

हरियाणा में ताऊ शब्द भर नहीं है बल्कि बहुत सम्मान का रिश्ता है। यहां तक किसी अनजान से बात करनी होती है तो हमउम्र को “ताऊ आले” कहकर पुकारते हैं। परंतु अब ताऊ की क्या हालत हो गयी है, उन्हें क्या सम्मान मिल रहा है वह हरियाणवी संस्कृति को जिंदा रखने वाले हरयाणवी पॉप गायक […]

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आरक्षण की आड़ में खिचती जातिगत तलवारें

December 24, 2020

आज़ादी के समय देश में चंद वर्षों के लिए सामाजिक रूप से दबे-कुचलों को आरक्षण देने की पहल शुरू की गई थी। तब यह आदर्श व्यवस्था मानी गयी थी कि इससे समता मूलक समाज का निर्माण होगा। परन्तु संविधान निर्मात्री सभा ने सोचा भी न होगा कि लोगों में बेईमानी-लोभ इतना गहरे बैठ जायेगा कि […]

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देखत जग बौराना, झूठे जग पतियाना………

December 24, 2020

पांच सौ साल पहले कबीर ने साधु को पहचानने की यह निशानी बताई थी – “साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय, सार-सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय॥” त्याग, संयम, सादगी और सहजता को साधुता की कसौटी मानने वाले कबीर को भारत में आने वाली सदियों में ‘साधु’ और ‘बाबा’ की बदल चुकी परिभाषा का […]

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