ये कहा आ गये हम

हरियाणा वह प्रदेश है जहां के निवासी गाम तो छोड़ो गुहाण्ड की छोरीयां नै भी बहन/बेटी मान्या करते, चाहे वह किसे भी जात की हो। विकास की या कौनसी हवा चाली के चार-पांच साल की जातगी भी हवासपूर्ती का साधन बन गयी। और पिछले 2-3 हफ़्ते तै तो ज्यादा समाज का सत्यानाश होण लाग् रह्या है।

जनता है कि सरकार नै दोषी साबित कर खुद की ज़िम्मेदारी पूरी कर ले रही है। कुछ ज्यादा जागरूक लोग व्यापारियों के घर भर के मोमबत्ती यात्रा निकाल अख़बारों में अपनी वाहवाही करवा लें रहे हैं। लेकिन मूल कारणों को कोई खोजना चाह रहे।

इनके पीछे का कारण म्हारी खाप पंचायतों नै खोजना पड़ेगा।

और लगाम लगानी पड़ेगी उन छोरां पै जो गायकी के नाम पै, हरयाणवी संस्कृति बचावण के नाम पै, नशे, द्विअर्थी, कविताई के नाम पै गली गलौच को सुपर हिट सॉन्ग कहते है।

और इन सुपर डुपर हिट गानों पर बाबू, बेटे, बेटी, बहू सब साथ साथ डांस कर खुद को आधुनिक जमाने का दिखाने के चक्कर में ऐसे सिंगरों को बढ़ावा देते हैं।

साथ ही हरियाणवी संस्कृति से मेल न खाने वाले जो कुंवारे प्रवासी काम के चक्कर में आते हैं उन पर कड़ी नज़रों का पहरा लगाना होगा।

अपने लड़कों में वह पुराने संस्करों को जगाने के लिए हम दो हमारे दो की पद्धति को छोड़ते हुए संयुक्त परिवार, सांझा चूल्हा जैसे गुणों को अपनाने की पहल करनी होगी और टीवी मोबाईल छोड़ कर दादी/नानी से कहानियों को सुनने की आदत डालनी होगी।

आधुनिकता, फैशन और आज़ादी के नाम पर नंगापन दिखाते हुए कपड़ो को भी युवाओं को छोड़ना होगा। तभी हम गर्व से कह सकेंगे – “हरियाणा एक, हरियाणवी एक, नंबर एक हरियाणा, म्हारी छोरीयां के किसे तै कम सैं, गाभरुआं की आन हरियाणा भारत की शान।”

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